सरकार ने बुजुर्गों का किया दिल खुश, पेंशन को लेकर बड़ा फैसला

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राज्य के विश्वविद्यालयों में वित्तीय गड़बड़ी थमने का नाम नहीं ले रही है। इस बार विश्वविद्यालयों ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा लगाई गई रोक के बावजूद सैकड़ों शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन और पेंशन का भुगतान कर दिया है। इस पर आपत्ति जताते हुए निदेशक (उच्च शिक्षा) डा. रेखा कुमारी ने कुलसचिवों से जवाब मांगा है। उच्च शिक्षा निदेशालय से मिली जानकारी के मुताबिक सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर न्यायमूर्ति एसबी सिन्हा आयोग द्वारा तकरीबन 204 कर्मचारियों और 89 शिक्षकों के वेतन, बकाया और पेंशन भुगतान पर रोक के बाद भी कुलसचिवों द्वारा राशि भुगतान कर दिया गया है। इनमें ज्यादातर सेवानिवृत्त शिक्षक और कर्मचारी शामिल हैं। यह संख्या और बढ़ सकती है।

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शिक्षा विभाग ने अपने निर्देश में कुलसचिवों से कहा है कि जिन शिक्षकों व शिक्षकेत्तर कर्मचारियों का सेवा सामंजन नहीं किया गया है, अगर उन्हें वेतन-पेंशन का भुगतान किया जा रहा है तो उस पर अविलंब रोक लगाएं। ऐसा नहीं करने पर सारी जवाबदेही विश्वविद्यालय और निकासी व्ययन पदाधिकारी की होगी। साथ ही संबंधित अधिकारियों पर आनुशासनिक व कानूनी कार्रवाई होगी। उल्लेखनीय है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील में 12 अक्टूबर 2004 को पारित न्यायादेश तथा 31 अगस्त, 2017 को पारित न्यायादेश के बाद सेवा सामंजन नहीं हुआ है

कोषागार में संविदाकर्मियों की खुलेगी सेवा पुस्तिका: कोषागार में संविदा पर कितने कर्मी काम कर रहे हैं? कौन कितने दिनों से हैं? उपस्थिति पंजी और लागबुक कहां हैं? जिलाधिकारी डा. चंद्रशेखर सिंह ने मंगलवार को विकास भवन स्थित  सचिवालय कोषागार का औचक निरीक्षण के दौरान कुछ इसी अंदाज में पूछताछ की। डीएम ने कहा कि संविदाकर्मियों की सेवा पुस्तिका खोलकर उनके कामकाज का मूल्यांकन की व्यवस्था करें। बिहार कोषागार संहिता 2011 के नियम 27 के तहत डीएम ने कोषागार का नियमित निरीक्षण किया। जिलाधिकारी ने कार्यालय में आगत और निर्गत पत्र पंजी, उपस्थिति पंजी, लाग बुक और भंडार पंजी के साथ सेवा पुस्तक का अवलोकन किया। उन्होंने संविदा कर्मी की सेवा पुस्तक खोलने का भी निर्देश दिया। साथ ही नए भवन के निर्माण के उपरांत ही कोषागार को शिफ्ट करने का निर्देश दिया।

 


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