दोगुनी होगी EPS 95 पेंशन, EPS सीमा को हटाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है मामला

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देश के लाखों EPS 95 पेंशनर्स लिए यह बहुत जरूरी सूचना है। EPF Pension को लेकर 4 मार्च 2022 को सुप्रीम कोर्ट से EPS 95 पेंशनधारकों के उच्च पेंशन मामलों पर सुनवाई हो सकती है। इस संबंध में ताजा खबर यह है कि EPS 95 के पेंशनधारकों को भविष्य निधि (EPF) पेंशन कितनी मिलेगी, यह जानने के लिए EPS 95 पेंशनर्स  को अब 4 मार्च का इंतजार करना पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने 24 अगस्त 2021 मंगलवार को इससे जुड़े मामले को 3 जजों की बड़ी पीठ के पास भेज दिया था। उसके बाद 25 अक्टूबर और 15 दिसंबर 2021 को सुनवाई होगी ऐसा उपडेट था पर कोई सुनवाई नहीं हुई थी।

6 जनवरी को EPFO से सम्बंधित दो जुड़े हुए 2 नए मामलों की सुनवाई करते हुए माननीय जस्टिस उदय उमेश ललित, माननीय जस्टिस एस रविंद्र भट्ट, माननीय जस्टिस ऋषिकेश राय की खंडपीठ ने फैसला देते हुए कहा कि इन सभी मामलों को भी WP नंबर 1658-8659/2019 के साथ मार्च के पहले सप्ताह में सूचीबद्ध किया जाए। उसके बाद इन मामलों को eps-95 पेंशनधारकों के अन्य मामले पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में दाखिल है तो उन मामलों के साथ सूचीबद्ध किए जाने के लिए कहा गया था। और सुप्रीम कोर्ट की ऑफिशियल वेबसाइट पर इन मामलों के लिए 4 मार्च 2022 की तारीख सुनवाई के लिए दिखा रही है। हालांकि यह computer-generated तारीख है तो इस पर बदलाव भी हो सकता है और तीन जजों पीठ का गठन भी कर दिया गया है। अब ईपीएस 95 पेंशन के मामलो को Honorable Mr. Justice Uday Umesh Lalit, Honorable Mr. Justice S Ravindra Bhat, Honorable Mr. Justice Hrishikesh Roy, अब ईपीएस 95 पेंशन मामले पर सुनवाई करेंगी।

क्या है EPS सीमा को हटाने का मामला

इस मामले पर आगे बढ़ने से पहले ये समझ लेते हैं कि आखिर ये पूरा मामला है क्या।  अभी अधिकतम पेंशन योग्य वेतन 15,000 रुपये प्रति महीने तक सीमित है।  मतलब, आपकी सैलरी चाहे जितनी हो, लेकिन पेंशन की कैलुकलेशन 15,000 रुपये पर ही होगी।  इस लिमिट को हटाने को लेकर मामला कोर्ट में चल रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने बीते साल 12 अगस्त को भारत संघ और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की ओर से दायर याचिकाओं के उस बैच की सुनवाई स्थगित कर दी थी, जिसमें कहा गया था कि कर्मचारियों की पेंशन को 15,000 रुपये तक सीमित नहीं किया जा सकता।  इन मामलों की सुनवाई कोर्ट में चल रही है।

अभी क्या है EPS को लेकर नियम?

जब हम नौकरी करने लगते हैं और EPF के सदस्य बन जाते हैं, तो उसी समय हम EPS के भी सदस्य बन जाते हैं। कर्मचारी अपनी सैलरी  का 12% हिस्सा EPF में देता है, इतनी ही रकम उसकी कंपनी की ओर से भी दी जाती है, लेकिन इसमें से एक हिस्सा 8.33 परसेंट EPS में भी जाता है।  जैसा कि हमने ऊपर बताया कि अभी पेंशन योग्य वेतन अधिकतम 15 हजार रुपये ही है, मतलब कि हर महीने पेंशन का हिस्सा अधिकतम (15,000 का 8.33%) 1250 रुपये होता है।

जब कर्मचारी रिटायर होता है तब भी पेंशन की गणना करने के लिए अधिकतम वेतन 15 हजार रुपये ही माना जाता है, इस हिसाब से एक कर्मचारी EPS के तहत अधिकतम पेंशन 7,500 रुपये ही पा सकता है।

ऐसे होती है पेंशन की कैलकुलेशन

एक बात जरूर ध्यान दें कि अगर आपने EPS में योगदान 1 सितंबर, 2014 से पहले शुरू किया है तो आपके लिए पेंशन योगदान के लिए मंथली सैलरी की अधिकतम सीमा 6500 रुपये होगी।  1 सितंबर, 2014 के बाद अगर आप EPS से जुड़े हैं तो अधिकतम सैलरी की सीमा 15,000 होगी।  अब देखिए कि पेंशन की कैलकुलेशन होती कैसे है।

EPS कैलकुलेशन का फॉर्मूला

मंथली पेंशन= (पेंशन योग्य सैलरी x EPS योगदान के साल)/70

यहां मान लेते हैं कर्मचारी ने 1 सितंबर, 2014 के बाद EPS में योगदान शुरू किया तो पेंशन योगदान 15,000 रुपये पर होगा।  मान लीजिए कि उसने 30 साल तक नौकरी की है।
मंथली पेंशन = 15,000X30/70
                 = 6428 रुपये

अधिकतम और न्यूनतम पेंशन

एक बात और याद रहे कि कर्मचारी की 6 महीने या इससे ज्यादा की सर्विस को 1 साल माना जाएगा और इससे कम हुआ तो उसकी गिनती नहीं होगी।  मतलब अगर कर्मचारी ने 14 साल 7 महीने काम किया है तो उसे 15 साल माना जाएगा।  लेकिन 14 साल 5 महीने  काम किया है तो सिर्फ 14 साल की ही सर्विस काउंट होगी।  EPS के तहत मिनिमम पेंशन की राशि 1000 रुपये प्रति महीना होती है, जबकि अधिकतम पेंशन 7500 रुपये होती है।


 


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