पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) में रिटायर्ड कर्मचारियों को भी हर 6 महीने में मिलने वाला महंगाई भत्ता भी मिलता था लेकिन नई स्कीम (NPS) में इसकी व्यवस्था नहीं

0 0
Read Time:6 Minute, 53 Second

राजस्थान और झारखंड सरकार ने अपने-अपने राज्यों में पुरानी पेंशन योजना बहाल करने का ऐलान कर दिया है। जिसके बाद अन्य राज्यों पर भी पुरानी पेंशन स्कीम को लागू करने का दबाव बन गया है। मध्य प्रदेश में भी यह मुद्दा गरमाता दिख रहा है और सरकारी कर्मचारी आगामी 13 मार्च को इस मुद्दे पर एक बड़ा प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस भी कर्मचारियों के समर्थन में कूद गई है और इसे लेकर सियासत भी शुरू हो गई है। तो आइए समझते हैं कि यह पूरा मामला क्या है और क्यों पुरानी पेंशन बहाली की मांग उठ रही है?

2004 में लागू हुई थी नई पेंशन स्कीम (NPS)

बता दें कि एक अप्रैल 2004 में तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने डिफेंस सर्विसेज को छोड़कर बाकी सरकारी सेवाओं में नई पेंशन स्कीम लागू कर दी थी। एक अप्रैल 2004 के बाद सरकारी सेवा ज्वाइन करने वाले कर्मचारियों को नई पेंशन योजना का लाभ दिया जा रहा है। सरकार ने इसे राज्यों के लिए अनिवार्य नहीं किया था लेकिन धीरे-धीरे अधिकतर राज्यों ने अपने यहां भी नई पेंशन स्कीम लागू कर ली थी।
MP में क्या है इसका पूरा गणित

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 1 जनवरी 2005 के बाद से मध्य प्रदेश में 3.35 लाख से ज्यादा कर्मचारी सरकारी सेवा में शामिल हुए हैं। इनमें 2.87 लाख टीचर और बाकी 48 हजार अन्य सेवाओं के कर्मचारी हैं। नई पेंशन स्कीम के तहत कर्मचारी के मूल वेतन से 10 प्रतिशत राशि काटी जाती है और उसमें सरकार 14 फीसदी अपना हिस्सा मिलाती है।


प्रदेश के 2।87 लाख टीचर्स की पेंशन योजना में सरकार अपने 14 फीसदी हिस्से से तकरीबन 7 हजार रुपए पेंशन खाते में जमा करती है। इस तरह प्रदेश के कुल टीचर्स के पेंशन खाते में सरकार हर माह 210 करोड़ रुपए जमा करती है। वहीं 48 हजार अन्य कर्मचारियों के पेंशन खाते में सरकार हर महीने करीब 3000 रुपए के हिसाब से कुल 134 करोड़ रुपए जमा करती है। इस तरह नई पेंशन स्कीम के तहत प्रदेश सरकार पर हर माह कुल 344 करोड़ रुपए का बोझ पड़ता है।

सरकार को मिलेगा ये फायदा

प्रदेश सरकार यदि कर्मचारियों की मांग पर पुरानी पेंशन योजना बहाल करती है तो उसे हर माह करीब 344 करोड़ रुपए की बचत होगी। 2005 में सरकारी सेवा में आने वाले कर्मचारी अपनी 30 साल की सेवा पूरी कर 2035 में रिटायर होंगे। इस तरह सरकार को अगले 12 साल तक हर महीने 344 करोड़ रुपए बचेंगे लेकिन रिटायरमेंट के बाद सरकारी खजाने पर बड़ा बोझ पड़ेगा!

वहीं यह मुद्दा सियासी भी हो गया है। दरअसल अगले साल ही एमपी में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में सरकार प्रदेश के लाखों कर्मचारियों की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहेगी। वहीं कांग्रेस इस मुद्दे को भुनाने में लग गई है और आगामी विधानसभा सत्र में भी यह मुद्दा उठ सकता है। ऐसे में अब सभी की नजरें इस बात पर लगी हुई हैं कि यह मामला किस करवट बैठता है।

जानिए क्या है पुरानी और नई पेंशन स्कीम में अंतर

पुरानी पेंशन योजना (OPS)में कर्मचारी की सैलरी से कोई कटौती नहीं होती थी। वहीं नई पेंशन स्कीम में कर्मचारी की सैलरी से 10 फीसदी की कटौती की जाती है। साथ ही 14 फीसदी हिस्सा सरकार मिलाती है।

पुरानी पेंशन योजना में रिटायर्ड कर्मचारियों को सरकारी कोष से पेंशन का भुगतान किया जाता था। वहीं नई पेंशन योजना शेयर बाजार आधारित है और इसका भुगतान बाजार पर निर्भर करता है।

पुरानी पेंशन योजना में जीपीएफ (General Provident Fund) की सुविधा होती थी लेकिन नई स्कीम में जीपीएफ की सुविधा नहीं है।

पुरानी पेंशन स्कीम में रिटायरमेंट के समय की सैलरी की करीब आधी राशि पेंशन के रूप में मिलती थी। जबकि नई पेंशन स्कीम में निश्चित पेंशन की कोई गारंटी नहीं है।

पुरानी पेंशन स्कीम में रिटायर्ड कर्मचारियों को भी हर 6 महीने में मिलने वाला महंगाई भत्ता भी मिलता था लेकिन नई स्कीम में इसकी व्यवस्था नहीं है।

पुरानी पेंशन स्कीम में कर्मचारियों को रिटायरमेंट के समय 20 लाख रुपए तक की ग्रेच्युटी मिलती थी लेकिन नई पेंशन स्कीम में ग्रेच्युटी का अस्थाई प्रावधान है।

पुरानी योजना में कर्मचारी की मौत पर उसके परिजनों को भी पेंशन मिलती थी। नई पेंशन स्कीम में भी कर्मचारी की मौत पर परिजनों को पेंशन मिलती है लेकिन योजना में जमा पैसा सरकार ले लेती है।

पुरानी पेंशन योजना में जीपीएफ के ब्याज पर कोई टैक्स नहीं लगता था लेकिन नई स्कीम में शेयर बाजार की गति के आधार पर जो पैसा मिलता है, उस पर टैक्स भी देना पड़ता है।

पुरानी स्कीम में कर्मचारियों को रिटायरमेंट के समय जीपीएफ में कोई निवेश नहीं करना होता था लेकिन नई स्कीम में 60 फीसदी फंड रिटायरमेंट के समय कर्मचारी को मिल जाता है लेकिन 40 फीसदी सरकार निवेश करती है और उसके आधार पर हर महीने की पेंशन मिलती है।


 


Source link
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published.