उच्च पेंशन वाले गैर-लाभार्थी ईपीएस 1995 पेंशनरों की वास्तविक वेतन/सेवा पर पर्याप्त न्यूनतम पेंशन बढ़ाने के निर्णय के संबंध में अनुरोध

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प्रति,

माननीय न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित,

भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश,

नई दिल्ली ।

विषय:- उच्च पेंशन वाले गैर-लाभार्थी ईपीएस 1995 पेंशनरों की वास्तविक वेतन/सेवा पर पर्याप्त न्यूनतम पेंशन बढ़ाने के निर्णय के संबंध में अनुरोध।

रेस्पेक्टेड युअर ऑनर,

उचित मान और उच्च सम्मान के साथ हम EPS-1995 पेंशनभोगियों को आप द्वारा भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभालने पर आप श्रीमान को शुभकामनाएं देते हुए अत्यंत खुशी हो रही है। जैसा कि आप जानते ही हैं कि ईपीएस-1995 के 80% से अधिक पेंशनभोगी 70, 75 वर्ष से अधिक आयु के हैं, और उन्हें वास्तविक/वास्तविक मजदूरी (सेवा समय) पर पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा है।

क्योंकि जिस परिवार पेंशन योजना (एफपीएस) 1971 की राशि इस उद्देश्य के लिए हमारे वेतन से काटी गई वह तो ईपीएस-1995 के खाते में विलय कर दी गई थी, लेकिन पेंशन की मात्रा निर्धारित करने वाली पेंशन योग्य सेवा के लिए इस अवधि की हमारी सेवा अवधि को वास्तविक सेवाकाल में शामिल नहीं किया गया और सेवा और कुछ मामलों में केवल दो साल का वेटेज दे दिया गया।

पेंशन की गणना करते समय सेवा की इस वास्तविक अवधि को शामिल नहीं किए जाने के परिणामस्वरूप, हमारी पेंशन केवल ₹200/- से अधिकतम ₹3500/- मासिक निर्धारित की जा सकी, जो वर्तमान राष्ट्रीय औसत जीवन यापन लागत ₹10000/- को छूती भी नहीं है।

इसलिए, माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष ईपीएस 95 पेंशनरों की अपील है कि दो व्यक्तियों के भरण-पोषण के लिए पर्याप्त न्यूनतम पेंशन की सख्त आवश्यकता है जिससे हम पेंशनर वर्तमान में जीवन यापन और सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा और मानवीय गरिमा सहीत संवैधानिक संरक्षण के तहत सामान्य जीवन के जी सकें।

अत: माननीय पीठ के निर्णय के साथ, जिसने ईपीएस-1995 पेंशनभोगियों की उच्च पेंशन के मामलों की सुनवाई के समापन पर निर्णय सुरक्षित रखा है के साथ ही न्यूनतम पेंशन के मुद्दे को मध्यम स्तर तक ले जाने के निर्णय के साथ न्यूनतम पेंशन की वर्तमान मात्रा में वृद्धि का आदेश पारित करने की हमारी प्रार्थना स्वीकार करें। करुणामय यह निर्णय मानवीय आधार पर स्व:संज्ञान के तहत हस्तक्षेप करके साथ-साथ उच्च पेंशन के मामलों पर आने वाले निर्णय के साथ ही इसपर भी अनुकूल आदेश एक ऐतिहासिक प्राकृतिक एवं पूर्ण न्याय होगा जो गरीब असहाय एवं शारीरिक रूप से दुर्बल पेंशनभोगियों को उम्र के अंतिम पड़ाव में दूसरों पर निर्भरता से मुक्त अपने सामान्य जीवन जीने के लिए एक बहुत ही जरूरी राहत प्रदान करेगा एवं हम जो वर्तमान में गंभीर आर्थिक असुरक्षा के कारण जीवन की दयनीय स्थिति से गुजर रहे हैं, हमारे जीवन के संवैधानिक अधिकार की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो जाएगी।

महोदय, यह न्यायसंगत व्यवस्था उपलब्ध कराकर हमारी न्यायपालिका की मानवाधिकारों और मानवीय पहलू के प्रति जागरूकता हमारे न्यायिक इतिहास का स्वर्णिम पृष्ठ साबित होने के साथ-साथ माननीय आप और आपके अधीनस्थ माननीय न्यायधीश जीवन भर देश के वरिष्ठ नागरिकों के दिलों में बने रहेंगे।*

उच्च सम्मान के साथ,

रणजीत सिंह दसून्दी 

ईपीएस 95 पेंशनभोगी



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